back to urticaria day 2015

Poem about urticaria in Hindi on ,

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Command Hospital (Southern Command)
Wanowrie,
411040 Pune
India
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A nice poem in Hindi composed on the occasion of the very first international event of world urticaria day just now! It in essence describes the symptoms, etiology, pathogenesis , treatment and sufferings of the pts of urticaria. लाल चकत्ते आते हैं हम को बड़ा सताते हैं Symptomatology कोई कहता पित्त है उछ्ली कोई कहे छपाकी है कितने जतन किये हैं हमने कुछ भी रहा न बाकी है जितना हम खुजलाते हैं ये उतना बढ़ते जाते हैं लाल चकत्ते आते हैं हम को बड़ा सताते हैं Etiology ( only partly covered) अण्डा मछली दूध मूंगफली सभी बंद कर डाले हैं फिर भी रोज़ उभर उठते हैं बड़ी मुसीबत वाले हैं बाहर का कुछ खाने से भी हम बेहद घबराते हैं लाल चकत्ते आते हैं हम को बड़ा सताते हैं Pathogenesis mast कोशिका मस्त हुई हैं रक्त की नलियाँ खोली हैं हिस्टामिन बाहर फेंका है जो करता हँसी ठिठोली है chymase और tryptase भी मिल कर उपद्रव फैलाते हैं लाल चकत्ते आते हैं हम को बड़ा सताते हैं Investigations नींद हमारी दूभर हो गई मूड हुआ धुंधला धुँधला कितनी जाँच करा बैठे हैं कारण फिर भी नहीं मिला जहाँ जहाँ हम जाते हैं सब नूतन जांच कराते हैं लाल चकत्ते आते हैं हम को बड़ा सताते हैं Management जब जब गोली खाते हैं ये गायब हो जाते हैं जैसे असर खत्म होता है वापिस ये आ जाते हैं गोली बंद नहीं है करनी सभी यही बतलाते हैं लाल चकत्ते आते हैं हम को बड़ा सताते हैं Message नहीं भयानक ये बीमारी बात यही समझानी है सारी चिंता दूर हटा कर दवा नियम से खानी है गाँठ बाँध लो बात ये अपनी "वर्मा" ये समझाते हैं लाल चकत्ते चले गए सब अब चैन की बंसी बजाते हैं लाल चकत्ते चले गए सब अब चैन की बंसी बजाते हैं कर्नल राजेश वर्मा Col Rajesh Verma MD, DNBE, MNAMS Prof & HOD (Derm), AFMC, Pune Senior Advisor (Derm & STD) Posted by: rajesh verma

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